घडी हमारी

 

घडी हमारी
टिकटिक करती घडी हमारी
जीस से चलती दुनिया सारी
घंटी बजाकर सुबह उठाती
समय पर उठने का अनुशासन सीख्लाती
कहती है ,हो जाओ जल्दी तैयार
देर से जाओगे तो पडेगी स्कूल मैं टीचर से मार
करती कीतनी मदद हमारी
टिकटिक करती घडी हमारी
जिस से चलती दुनिया सारी

दोपहर को कहती एक बज गया
टेबल पे दोपहर का खाना सज गया
खाकर खाना थोडा कर लो आराम
फीर करना है स्कूल का मिला हुआ काम
करती कीतनी देखभाल हमारी
टिकटिक करती घडी हमारी
जीस से चलती दुनिया सारी

शाम को कहती थोडा खेल लो
अपने दोस्तों से तुम मील लो
मील कर कर लो बातें तुम सारी
अब है घर जाने की बारी
टिकटिक करती घडी घडी हमारी
जीस से चलती दुनिया सारी

रात को कहती समय पर सो जाओ
सुंदर सपनो की दुनिया मैं तुम खो जाओ
अब आई आराम की बारी
मीट जायेगी थकान सारी
टिकटिक करती घडी घडी हमारी
जीस से चलती दुनिया सारी

( संजय कुमार फरवाहा )

 

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