हाथी मैं तेरा तू मेरा महावत

यह गीत मैंने अपने बहुत ही प्यारे दोस्त , भाई , एक मार्गदर्शक विक्रम रावत के लीए लिख रहा हूँ । यह गीत मैंने तब लिखा था जब वह मुझ से नाराज हो गया था । उस की ट्रान्सफर २००2 मैं Bathinda हो गई अब वह मुझ से दूर है ,यह गीत मैं अपने ब्लॉग पर डाल कर उसे बीते दीनो की याद दीलाना चाहता हूँ ।

हाथी मैं तेरा तू मेरा महावत
ओ विक्रम रावत
जो तू कहेगा
वो मैं करूँगा
होगी ना कोई शिकायत
ओ विक्रम रावत ।।

सूंड को मेरी जब तू सहलाये
दिल मेरा डोले झूम झूम जाये
पूंछ हिला के तेरे पीछे चलूँ जब
संभले न मेरी नजाकत
ओ विक्रम रावत
हाथी मैं तेरा तू मेरा महावत
ओ विक्रम रावत
जो तू कहेगा
वो मैं करूँगा
होगी ना कोई शिकायत
ओ विक्रम रावत ।।

कत्थक दिखाऊ के डिस्को दिखाऊ
बन के तेरा झुमरू मैं झूम झूम जाऊं
नाच दिखाऊ तुझ को मनाऊं
हो जाए ना जब तक थकावट
ओ विक्रम रावत
हाथी मैं तेरा तू मेरा महावत
ओ विक्रम रावत
जो तू कहेगा
वो मैं करूँगा
होगी ना कोई शिकायत
ओ विक्रम रावत ।।

भाई तू मेरा तू ही सहारा
तू ही मेरा मंदिर तू ही गुरुद्वारा
गीत बनाऊं तुझ को मनाऊं
जब तक छोड ना दे तू बगावत
ओ विक्रम रावत
हाथी मैं तेरा तू मेरा महावत
ओ विक्रम रावत
जो तू कहेगा
वो मैं करूँगा
होगी ना कोई शिकायत
ओ विक्रम रावत ।।
{ संजय कुमार फरवाहा }

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    1 Comment (+add yours?)

    1. Manas Khatri
      Nov 06, 2010 @ 18:25:24

      बहुत ही सुन्दर रचना|
      आप ने अपने नाराज़ मित्र को मानाने के लिए बड़ा ही सुन्दर गीत लिखा है| मैं अगर आप के मित्र की जगह होता तो यही कहता, यूं ही गीत लिखो दोस्त..आज के बाद कभी नाराज़ नहीं होंगा..
      बहुत ही बढियाँ…शुभकामनाएं.

      Reply

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