ऐ बरगद के पेड़ मुझ से बातें कर मुझे छेड़

ऐ बरगद के पेड़
मुझ से बातें कर मुझे छेड़
लोटा दे मेरा बीता बच्पन
खेल खीलोने , संगी साथी
और छुक – छुक करती रेल
ऐ बरगद के पेड़
मुझ से बातें कर मुझे छेड़

तेरे डाल पकड़ कर झूलते जाना
एक , दो , तीन की गीनती गिनना
फिर नीचे कूद लगाना
तेरे चारों तरफ घूमना
जोर-जोर से चिल्लाना
चंदु, रामू , राधा ,मोहन से
एक बार फीर से करा दे मेल
ऐ बरगद के पेड़
मुझ से बातें कर मुझे छेड़
लोटा दे मेरा बीता बच्पन
खेल खीलोने , संगी साथी
और छुक – छुक करती रेल

छुट्टी का दीन तेरी छाव में बीताना
तेरी शाखाओं पर झुला बनाना
झूलते जाना , हाथ ना आना
काठ की छोटी सी गाड़ी बनाना
मिट्ठु और राधा को उस में बिठाना
खींचते जाना शोर मचाना
कितना प्यारा था वोह खेल
ऐ बरगद के पेड़
मुझ से बातें कर मुझे छेड़
लोटा दे मेरा बीता बच्पन
खेल खीलोने , संगी साथी
और छुक – छुक करती रेल

बारिश के दीन तेरे डाल हीलाना
गीरती बूंदों को मुहँ पर गीराना
भीगते जाना , बाज़ ना आना
जब तक खत्म न हो जाये खेल
ऐ बरगद के पेड़
मुझ से बातें कर मुझे छेड़
लोटा दे मेरा बीता बच्पन
खेल खीलोने , संगी साथी
और छुक – छुक करती रेल

तेरी शाखाओं पर कूदते जाना
उन पर से गीरना चोट छुपाना
खेल खत्म होने से पहले घर वापीस ना जाना
बीना कहे कीसी को दर्द सहते जाना
माँ को पता लगा तो मार पड़ेगी
दोबारा खेलने ना देगी पेड़ -पेड़
ऐ बरगद के पेड़
मुझ से बातें कर मुझे छेड़
लोटा दे मेरा बीता बच्पन
खेल खीलोने , संगी साथी
और छुक – छुक करती रेल


छुपन -छुपाई खेलते जाना
दो,पाँच,दस जल्दी गीनकर
तेरी तने के पीछे छुप बैठ जाना
पकडे गए तो हार ना मानना
लंगड़ी टांग , पोषम पा
खेलते जाना , शोर मचाना
नाचते जाना
कितना पायरा था वोह खेल
ऐ बरगद के पेड़
मुझ से बातें कर मुझे छेड़
लोटा दे मेरा बीता बच्पन
खेल खीलोने , संगी साथी
और छुक – छुक करती रेल

{ संजय कुमर फरवाहा }

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1 Comment (+add yours?)

  1. Ram Babu
    Mar 08, 2014 @ 12:04:24

    very nice poem

    Reply

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