हमारे बस्तों का बोझ कम हो इस बार


हम बच्चों की यही पुकार
हमारे बस्तों का बोझ कम हो इस बार

हम से मोटी हमारी पुस्तक
कैसे पढेगा हमारा छोटा सा मस्तिक्ष
मन की हमारे मन में ही रह जाती
स्कूल का काम करते -करते खेलने की बारी नहीं आती
इतना ना इस छोटे से तन और मन पर बोझ ल्द्वाओ
हम बच्चों पर कुछ तरस तो खाओ
कब तक बने रहेंगे लाचार
कब तक उठाएँगे यह बोझ हम निर्बल लाचार
निर्बल तन और मन की यही पुकार
हमारे बस्तों का बोझ कम हो इस बार

ऐसा पाठ्यक्रम नया बने
जिस से ना विद्यार्थी कभी डरें
सम्पुर्ण हो तन और मन का विकास
यही होगा हम बच्चों का सही उपहार
नया ज्ञान का दीप जलाओ
हम बच्चों पर कुछ तरस तो खाओ
हम बच्चों की यही पुकार
हमारे बस्तों का बोझ कम हो इस बार

{ संजय कुमार फर्वाहा }

स्वाह

नशा जिस किसी के भी जीवन मैं आ बसा
उस का जीवन कर दिया स्वाह
मेरा यह प्रयास है उस का साक्षात् गवाह
मेरे दोस्त खुद पे ना यह जुल्म ढाह
वरना तू भी हो जायेगा स्वाह
आज ही कर ले नशे से तोबा
मत बन इतना बेपरवाह
क्यूंकि
नशा जिस किसी के भी जीवन मैं आ बसा
उस का जीवन कर दिया

(संजय कुमार फर्वाहा )